2. Our Founder's.
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Name : Dr. Yadav Subesingh
Address : Village - Bhilwra, Teh - Ateli Mandi, Distt - Mahendragarh, State - Haryana, Pin Code - 123021,
Visionary : SPIRITUAL WORLD
Mob. No : +91-9050959789
Email-ID : subesinghyadav2009@gmail.com
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Name : Brigadier (Dr) RajaRam Yadav (Retired RVC Army)
Address : 30, F/F, Satya Niketan, Moti Bagh-2, Chanakyapuri,South West Delhi -21
Visionary : SPIRITUAL WORLD
Mob.No : +91-9868850057
Email : rryadavarvc@gmail.com
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Name : DIG Sumersingh Yadav (Retired) CRPF
Address : Flat no 83,Royal green apartments, Pocket 3, Sec.2, Dwarka, New Delhi 75
Visionary : SPIRITUAL WORLD
Mob. No : +91-9818001291
Email-ID : sumer.yadav1234@gmail.com
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Name : Dr. Ashok Yadav (Retired) Principal Goverment of Haryana
Address : Bawal Road, Kamalpur, Rewari, Pin Code - 123401
Visionary : SPIRITUAL WORLD
Mob. No : +91-8053997295
Email-ID : @gmail.com
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Name : Dr. Satya Pal Yadav Senior Advocate
Address : Punjab Haryana Highcourt Chandigarh
Visionary : SPIRITUAL WORLD
Mob. No : +91-9467001972
Email-ID : @gmail.com
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3. Why Total Truth
मानव जाति युगों से संघर्ष करती आ रही है। विकास और विनाश के मध्य उसने बहुत कुछ देखा / सीखा है।
मुझे सब कुछ पता है, ऐसा दावा करते हुए भी लोग आधुनिकता की दौड़ में अब भोगवाद की पटरी पर ढलान की ओर लुढ़क रहे हैं।
जिसके चलते आज परिवार टूट रहें हैं। समाज में तनाव बढ़ रहा है। रिश्ते बिखर रहे हैं। आदमी अकेला होता जा रहा है। जलवायु बिगड़ रहा है। गंतव्य विहीन, भविष्य से अनजान लोग अंधेरे में भटक रहे हैं।
जबकि उन्हें मोक्ष के मार्ग में भी समान गति से चलना चाहिए था।
रचयिता की मंशा, जीवन के उद्देश्य, धर्म और वसुधैव कुटुंबकम् के मर्म से अनभिज्ञ भटकते व्यक्तियों को, धर्म, राष्ट्र की महत्ता व रचयिता की मंशा के साथ– साथ जीवन के वास्तविक उद्देश्य की पहचान एवं पूर्ति करवाने व करने के उपाय बताने के लिए इस संस्था की स्थापना हुई है l
Total Truth : एक ट्रस्ट के रूप में रजिस्टर्ड संस्था है l
मनुर्भव, सर्वे भवन्तु सुखिन: सर्वे संतु निरामया, वसुधैव कुटुंबकम् की ओर ले जाने वाले मार्ग से
अर्थात मानव जाति अपने वास्तविक उद्देश्य से भटके नहीं इसलिए कुछ सजग प्रहरियों के विवेक ने एक दिया जलाने का यह परोपकारी कार्य किया है।
4. Why existing system are not enough
अधिकतर लोग सोचते हैं, पैसा आ जाएगा तो सब कुछ ठीक - ठाक हो जाएगा। कुछ का कहना हैं, यदि लोग मेरे मत को अपना लेंगे तो दुनिया में अमन चैन छा जाएगा। कईयों का विचार है, मेरी पार्टी व मेरा शासन कायम हो जाएगा तो सबके जीवन सुखी बना दिए जाएंगे। वैज्ञानिक बताते हैं, केवल विज्ञान ही सभी के जीवन में खुशी ला सकता है।
मैं कहता हूँ, यह सब अपने - अपने स्थान पर सही हैं, किन्तु आधे...।
बहुतों के पास बहुत पैसा है फिर भी उनके जीवन में सबकुछ ठीक - ठाक नहीं है।
कई व्यक्ति और पार्टियां वर्षो शासन में रहे / रही हैं परन्तु वह भी सबके जीवन सुखी नहीं कर पाए।
कई क्षेत्र हैं, उसमें एक ही मत के अनुयायी बसते हैं वहाँ भी सुख शान्ति नहीं है ।
हाँ विज्ञान ने कुछ सहुलियत, गति और शक्ति अवश्य दी है लेकिन कठिनाइयां भी उतने ही अनुपात में बढी हैं ।
पैसा आवश्यक है, शासन की अपनी अहमियत है, व्यक्ति का अपना मत हो सकता है और विज्ञान का अपना स्थान है। यह सब हमें चाहिए किन्तु इनके होने के पश्चात भी व्यक्ति के अंदर एक रिक्त स्थान निरन्तर बना रहता है ।
इसका क्या कारण हो सकता है ? कभी सोचा आपने... !
उसका कारण है, हम अपनी अन्तरात्मा की चाहत और रचयिता की मंशा को अब तक नहीं जान व समझ पाए हैं।
इसलिए अनजाने में लोगों को सुखी करने के लिए परोपकारी लोग भी भोग प्रधान योजना ही बनाते आए हैं।
जैसे :- 2015 में संयुक्त राष्ट्र संघ के सभी सदस्य राष्ट्रों ने 2030 तक सतत विकास के लिए 17 कार्यक्रमों की घोषणा की है। परन्तु उनमें एक भी अध्यात्मिक कार्यक्रम नहीं है। इसलिए Total Truth एक नया और सरल मोक्षदायिनी "One person own planet." दर्शन को CAREER IN SPIRITULTY,
SPIRITULTY IN CAREER नामक एक कार्यक्रम के रूप में प्रस्तावित किया है।
5. CAREER IN SPIRITULTY, SPIRITULTY IN CAREER.
Spirituality is for pleasure of the people by The God.
सुख और खुशी सबको चाहिए।
आता - जाता सुख व आती - जाती खुशी नहीं बल्कि स्थायी सुख व स्थायी खुशी चाहिए।
सुख साधनों से मिलता है और खुशी समझ की प्राप्ति से होती है । साधन सदैव किसी के पास नहीं रहते हैं, इसलिए सुख तो आता - जाता ही मिलेगा।
पर खुशी सच की प्राप्ति यानी वास्तविक सच जानने पर अवश्य स्थायी हो जाती है।
साधन सम्पन्न व्यक्ति सुखी हो सकता है पर जरूरी नहीं कि वह खुश भी हो।
अनन्त खुशी का दाता शाश्वत सत्य आध्यात्मिक जीवन जीने पर ही समझ में आता है।
स्थायी खुशी के लिए अपना करियर अध्यात्म से बनाएं और जो भी करियर आपके पास है उसमें अध्यात्म लाएं।
आजीविका अपनी प्रतिभा से, अवस्था उचित व्यवस्था से और भविष्य सच्चे दर्शन से बनाएं।
सबके जीवन में खुशियां भरने के लिए अध्यात्म से करियर और करियर में अध्यात्म लाना एक मात्र उपाय है और यह हमारा कार्यक्रम हैं।
6. Total Truth a synergy platform.
Am of Total Truth : ऋषि परम्परा के द्वारा World को Spiritual बनाना है। अर्थात एक आध्यात्मिक जगत का निर्माण करना है।
लोगों के जीवन को समृद्धशाली बनाना है।
जीवन के वास्तविक उद्देश्य को स्प्ष्ट करके उसकी पूर्ति करना और करवाना है।
दर्शन : हम एक ऐसे संसार के निर्माण का दर्शन देखते हैं। जिसमें सभी को शारीरिक, मानसिक, आर्थिक, सामाजिक एवं आध्यात्मिक विकास के सुअवसर सम्मान सहित समान प्राप्त हो l
सब धरती गौपाल की सब में बसे राम की भावना सबके मन में हो।
"One Person Own Planet" का ज्ञान हो।
सूत्र : एक शब्द एक व्यक्ति को बदल सकता है और बदला हुआ व्यक्ति अपने परिवार, समाज, राष्ट्र, महाद्वीप को, तो क्या ? पूरे विश्व को बदल सकता है। कदाचित वह बदले हुए व्यक्ति आप हो सकते है।
पथ : ज्ञान = धर्म विज्ञान और राज के समन्वय, सामंजस्य से उत्तरोत्तर विकास की ओर...।
सेवाएँ : नेतृत्व की खोज व नेतृत्व तैयार करना, रचनात्मक कार्य, सुंदर स्वच्छ विश्व, हरा- भरा विश्व, परमार्थी पुरुषार्थी समाज, साक्षर संसार, सहिष्णु वातावरण, ज़िम्मेदार नागरिक, समर्पित परिवार, स्वावलंबी लोग, स्वस्थ जगत व मानव को महान बनाने वाली सभी आवश्यक सेवाएँ l
नीति : चीजों का सदुपयोग और नैतिक मूल्यों का पालन करना।
सन्देश : उत्तम हो, सर्वोत्तम बनों।
उद्घोष : DO BEST, BE BEST.
हमारी मान्यता : मनुष्य जीवन ईश्वर की ओर से एक अद्भुत वरदान है । पृथ्वी पर यह जीवन हमें विशेष उद्देश्य की पूर्ति के लिए दिया गया है। समस्त ब्रह्माण्ड पृथ्वी के लिए और पृथ्वी में जो कुछ है, वह सब मनुष्य के लिए और मनुष्य को रचयिता ने आनन्द का सहभागी होने और आनन्द का सृजन करने के लिए ही सृजा है।
सृष्टिकर्ता परमपिता परमात्मा चाहता है जिन्दगी एक उत्सव बनें और उसमें, उसकी सृष्टि हरपल आनन्द करें।
वह आनन्द देना चाहता हैं क्योंकि सृष्टि का सृजन ही आनन्द की संवृद्धि के लिए हुआ हैं और हम आनन्द लेना चाहते हैं क्योंकि यह हमारी अंतरात्मा की चाहत है।
नोट :- फिर आनन्द मिलता क्योँ नहीं ? अवरोध कहाँ है ? इसी अवरोध को मिटाने और आपके जीवन को आनन्द से भरने और इस धरा को और बेहतर स्थिति में छोड़कर जाने के लिए ही Total Truth कार्यरत हैं।
खुला निमंत्रण : परमेश्वर पिता के अनन्त उद्देश्यों से जब – जब मानव जाति विमुख होती है, तब – तब वह महान – विभूतियों को भेजकर उनके द्वारा साधारण मनुष्यों को बुलाकर मानवहित में कार्य करवाता आया है । सम्पूर्ण सत्य के नाम का यह प्रयास भी उसका ही अंधेरे को कोसने की बजाय एक दिया जलाने का है।
आईए वह आपको बुला रहा है उसके निमंत्रण को स्वीकार करकें, हम सब एक – दूसरे के सहयोगी बनकर आत्मकल्याण, पुरुषार्थ और सुंदर, सुखमय भविष्य के लिए परोपकार करतें हुए एक आध्यात्मिक जगत का निर्माण करें, क्योंकि पुरुषार्थ आत्मकल्याण करता है और परोपकार प्रारब्ध बनाता है l
सामाजिक प्रतिष्ठा एवं आजीविका का जो भी साधन अब आपके पास है । वह आपके अपने प्रारब्ध की ही देन हैं।
इसका प्रमाण: एक झोली में फूल तो एक झोली में कांटे, पल में राजा, पल में रंक, एक मुंह में सोने की चम्मच लेकर दुनिया में आता है तो दूसरा जिन्दगी भर हाथ पसारे रह जाता है।भविष्य में कोई वीरान न हो इसके लिए वह सदैव प्रयत्नशील रहता हैं।
उसका कहना हैं।
बस यहीं प्रयास मैं हर बार करता हूँ l
आदमी हूँ, आदमी बन कर, आदमी से प्यार करता हूँ l
मैं बसाना चाहता हूँ, एक और स्वर्ग अपनों के लिए, मेरे जिसमें सब रहे फरिश्ते बनकर l
हमारा कार्य :
ऋषि परम्परा को आज के परिवेश में भारत के साथ – साथ पूरे विश्व में पुनः स्थापित करना है।
7. Membership
सदस्यता केवल एक प्रकार की है।
वह भी संस्कारी भाई /बहनों से 11/- रुपए मासिक लेना है।
इसके एवज में ऋषि - ऋषिकाएं अपनी अध्यात्मिक सेवाएं उन्हें देंगे।
8. Traning program's.
गुरुकुल पद्धति स्थापित करके वर्ष में तीन- तीन महीने का चार बार 10 युगल को स्वीकृत पाठ्यक्रम का प्रशिक्षण देकर उन्हें ऋषि - ऋषिका के सम्मान से सम्मानित कर दसों दिशाओं में सम्पूर्ण सत्य का प्रचार- प्रसार करने के लिए मानदेय के साथ भेजते रहना हैं।
पाठ्यक्रम
* आत्मसाक्षात्कार मैं कौन हूं ? कहां से और इस पृथ्वी पर क्यों आया हूं ?
* यह संसार क्या है इसे कब, किसने, कैसे और क्यों बनाया है ?
* जीवन में उतार चढाव के कारण क्या हैं और अब उनका निवारण क्या है ?
* शारीरिक मृत्यु के बाद जीवन है कि नहीं यदि है तो उसके प्रमाण क्या है और वह कैसा है ?
* मेरे जीवन का उद्देश्य और रचयिता की मंशा क्या है ?
* जीवन जीने का पृथ्वी पर सही सूत्र क्या है ?
* आज अभी मेरा यहां क्या कर्तव्य है ?
ऋषि - ऋषिका को अपने - अपने कार्य क्षेत्र में एक गुरुद्वार, एक गुरुकुल, एक गौशाला, एक ग्राम सेवादल और एक आरोग्यशाला का निर्माण करना ही करना है।
9. About "srujanhar ka uphar" book.
"सृजनहार का उपहार" पुस्तक में वर्णित दर्शन भारत को फिर से विश्वगुरु बनाने में सक्षम है।
लेखक का कहना है, प्रकृति और आवश्यकता दोनों हमारे सबसे बड़े गुरु हैं। हम अब तक जो कुछ सीखें हैं। वह अपनी पाँच ज्ञानेन्द्रियों एवं अपने स्वभाव के द्वारा गुरु, शुभ चिन्तकों के सहयोग तथा प्राकृतिक घटनाओं और पूर्वजों के अनुभवों को माध्यम बनाकर सीखें हैं।
जो प्राप्तियां हमारे पास है । वे सब प्राप्त ज्ञान को पाँच कर्मेन्द्रियों के परिश्रम से संयुक्त करने पर ही मिली हैं।
प्रकृति की घटनाएं स्पष्ट और सटीक उत्तर देती हैं। बस उन्हें ठीक से समझ लिया जाए। प्रकृति स्वयं ईश्वर का ही प्रबंधन हैं।
अगम परिश्रम अनम्य त्याग, तपस्या के बल पर मानव कुल का गौरव बढाने वाले ऋषिपुत्र सुबेसिंह सत्यदर्शी ने मानव का ही नहीं समस्त समष्टि का कल्याण करने और भारत को फिर से विश्वगुरु बनाने वाला एक नया "आप सब ब्रह्मा हैं और पृथ्वी पर की पूर्णता के पश्चात् आपका अपना व्यक्तिगत एक ब्रहमाण्ड होगा " One Person Own Planet का दर्शन दिया है।
उन्होंने बताया की सम्पूर्ण सत्य कारण, कर्ता, क्रिया एवं कार्य को सामने रखकर फिर चीजें हो या घटनाएं उनके आगे सात "क" लगाने पर ही प्रकट होता है। कौन, क्या, कब, कैसे, किसने, किसके और क्यों ? एक भी "क" बाकी रह गया तो पूर्ण सत्य से आप वंचित रह जाएंगे ।
उन्होंने ने सात प्रश्नों के उत्तर उद्देश्य मूलक पद्धति के द्वारा वैज्ञानिक, व्यवहारिक, सुखद परिणामदायक एवं सार्वभौमिक नियमों की कसौटियों पर कस, परखकर दिए हैं।
1. मैं कौन हूँ ?
2. कहाँ से और क्यों आया हूँ ?
3. जिस किसी कार्य के लिए मैं पृथ्वी पर आया हूँ उस कार्य को अब कैसे पूर्ण कर सकता हूँ ?
4. यह संसार क्या है ?
5. इसे कब, किसने, कैसे और क्यों बनाया है ?
6. जीवन में दुःख हैं उनका क्या कारण है और अब उनका क्या निवारण हैं ?
7. शारीरिक मृत्यु के बाद जीवन है कि नहीं यदि है तो वह कैसा और उसका प्रमाण क्या है ?
उनका मानना है, मनुष्य जीवन के उद्धेश्य और रचयिता की मंशा का ज्ञान व पूर्ति के सूत्र जब सबको पता हो जाएगा तब पृथ्वी पर कोई वाद - विवाद शेष ही नहीं रहेगा। बचेगा तो आनन्द, सहयोग, प्रेम, शान्ति और उत्साह ।
इन सभी प्रश्नों के उत्तर अपनी रचना "सृजनहार का उपहार" ग्रंथ में यदुकुल गौरव ने दिए हैं।
उनका कहना है, यह दर्शन जैसे - जैसे जन - जन तक पहुँचता चला जाएगा वैसे - वैसे आदमी सुखी और दुनिया से अभाव, भय, भ्रम, भूख भ्रष्टाचार, धर्मान्धता, युद्ध एवं पाखण्ड समाप्त होता जाएगा।
10. Steps for Becoming a Associate
Partner & Committees of Total Truth Movement.
1. संस्कारी भाई / बहन बनें।
2. ऋषि और ऋषिका की जिम्मेदारी लें।
3. 1,2,3,4,5 समितियों में सहभागी हों।
1. Spiritual Committee
आध्यात्मिक समिति।
*Philosophy or vision को स्पष्ट करने वाली समिति।
2. Decision Committee निर्णय समिति।
*Vision को Mission बनाने वाली समिति।
3. Planning Committee योजना समिति।
*निर्णय को पूर्ण करने के लिए योजना बनाना।
4. Implementors Committee कार्यान्वयन समिति।
*निर्धारित योजना को क्रियान्वित करना।
5. Fund Raging Committee
धन संचय समिति।
*सेवाकार्य को सुचारू चलाने के लिए वित का प्रबंधन करना।